Surah Juma In Hindi | सूरह जुमा हिंदी में

Surah Juma In Hindi

Surah Juma in Hindi | सूरह जुमा हिंदी में तर्जुमा के साथ

सूरह अल-जुमु’अह क़ुरआन ए करीम की 62वि सूरह है। इसमें 11 आयात है। इस पोस्ट में सूरह जुमा हिंदी में तजुर्मे (Surah Juma In Hindi)  के साथ पढ़ेंगे। सूरह जुमा मदनी सूरह है, क्योंकि ये मदीना मनव्वरा में नाज़िल हुई थी। यहाँ→सूरह रहमान हिंदी में  देखिए|

इस पोस्ट में सूरह जुमा अरबी (Surah Juma In Arabic) में भी दी हुई है। ताकी अरबी सीखने वालों को भी मदद हो।

Surah Juma Kab Padhna Chahiye? | सूरह जुमा कब पढ़ना चाहिए?

सूरह जुमा जुमा के दिन किसी भी वक़्त पढ़ सकते है। ये सूरह क़ुरआन पाक के 28वे पारे में है।

Surah Juma in Hindi (Tajurma) | सूरह जुमा का हिंदी तजुर्मा

أَعُوْذُ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطٰانِ الرَّجِيْمِ

“अ ‘ऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम,

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम”

“मैं अल्लाह त’आला की पनाह में आता हूँ शैतान ने मरदूद से,

अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान व रहम वाला है।”

1. يُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ٱلْمَلِكِ ٱلْقُدُّوسِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَكِيمِ

1. युसब्बिहू लिल लाहि मा फिस समावाति वमा फिल अरज़िल मलिकिल क़ुद-दूसिल ‘अजीज़िल हकीम

1. आसमान व ज़मीन की तमाम चीज़ें अल्लाह त’आला की पाकी बयान करती हैं जो बादशाह हैं से ल) पाक हैं, ग़ालिब और हिकमत वाले हैं

2. هُوَ الَّذِي بَعَثَ فِي الْأُمِّيِّينَ رَسُولًا مِّنْهُمْ يَتْلُو عَلَيْهِمْ آيَاتِهِ وَيُزَكِّيهِمْ وَيُعَلِّمُهُمُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَإِن كَانُوا مِن قَبْلُ لَفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ

2. हुवल लज़ी ब’अ-स फिल उममिय यीना रसूलम मिन्हुम यतलू ‘अलैहिम आयातिही व युज़क कीहिम व यु’अल्लिमु हुमुल किताब वल हिक-म-त वइन कानू मिन क़ब्लु लफ़ी ज़लालिम मुबीन

2. वही ख़ुदा है जिस ने अनपढ़ लोगों में उन ही में से एक नबी भेजा जो उन पर अल्लाह त’आला की आयतें पढ़ कर सुनाते हैं, उन को अक़ीदा व अमल की गंदगियों से पाक व साफ़ करते हैं, और उन को किताब और हिकमत की तालीम देते हैं हालांकि इस से पहले ये लोग खुली हुई गुमराही में थे

3. وَآخَرِينَ مِنْهُمْ لَمَّا يَلْحَقُوا بِهِمْ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ

3. व आखरी न मिन्हुम लम्मा यल्हक़ू बिहिम वहुवल ‘अज़ीज़ुल हकीम

3. और उन दुसरे लोगों की तरफ भी भेजा जो अभी मुसलमानों के साथ नहीं मिले (लेकिन आइन्दा ईमान लायेंगे) और अल्लाह ही ग़ालिब और हिकमत वाले हैं

4. ذَ‌ٰلِكَ فَضْلُ اللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ

4. ज़ालिका फज़लुल लाहि युअ’तीहि मय यशाअ वल-लाहू ज़ुल फज़लिल अज़ीम

4. ये अल्लाह त आला का फज्लो करम है जिसे चाहते हैं अता फरमाते हैं और अल्लाह बड़े करम वाले हैं

5. مَثَلُ الَّذِينَ حُمِّلُوا التَّوْرَاةَ ثُمَّ لَمْ يَحْمِلُوهَا كَمَثَلِ الْحِمَارِ يَحْمِلُ أَسْفَارًا ۚ بِئْسَ مَثَلُ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِ اللَّهِ ۚ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ

5. म सलुल लज़ीना हुममिलुत तौराता सुम्म लम यहमिलूहा क-म-सलिल हिमारि यहमिलु अस्फारा बिअ,सा म-सलुल क़ौमिल लज़ीना कज्ज़बू बिआयातिल-लाह वललाहू ला यहदिल कौमज़ ज़ालिमीन

5. जिन लोगों को तौरात दी गयी, फिर उन्होंने उसको नहीं उठाया (यानी अमल नहीं किया) उन की मिसाल उस गधे की सी है, जो बहुत सी किताबें लादे हुए हो, कितनी बुरी मिसाल है उन लोगों की जिन्होंने अल्लाह त’आला की आयातों को झुटलाया, और अल्लाह ज़ुल्म करने वालों को हिदायत नहीं देते

यहाँ→Surah Al Lail in Hindi Translation देखिए|

6. قُلْ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ هَادُوا إِن زَعَمْتُمْ أَنَّكُمْ أَوْلِيَاءُ لِلَّهِ مِن دُونِ النَّاسِ فَتَمَنَّوُا الْمَوْتَ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ

6. क़ुल या अय्युहल लज़ीना हादू इन ज़अमतुम अन्नकुम अव्लियाउ लिल-लाहि मिन दूनिन नासि फ़ तमन्नवुल मौ-त इन कुन्तुम सादिक़ीन

6. आप कह दीजिये : ए यहूदियों ! अगर तुम्हारा गुमान है कि तमाम लोगों को छोड़ कर तुम ही अल्लाह के दोस्त हो, तो अगर तुम सच्चे हो तो मौत की तमन्ना करो

7. وَلَا يَتَمَنَّوْنَهُ أَبَدًا بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِالظَّالِمِينَ

7. वला य-त-मन नौनहू अबदम बिमा क़द-दमत ऐदीहिम वल-लाहु ‘अलीमुम बिज़ ज़ालिमीन

7. वो अपनी हरकतों की वजह से जो पहले कर चुके हैं कभी मौत की तमन्ना नहीं करेंगे और अल्लाह इन जालिमों से खूब वाकिफ हैं

8. قُلْ إِنَّ الْمَوْتَ الَّذِي تَفِرُّونَ مِنْهُ فَإِنَّهُ مُلَاقِيكُمْ ۖ ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

8. क़ुल इन्नल मौतल लज़ी तफिररूना मिन्हु फ़इन्नहू मुलाक़ीकुम सुम्मा तुरददूना इला ‘आलिमिल ग़ैबि वश शहादति फ़ युनब-बिउकुम बिमा कुन्तुम त’अमलून

8. आप कह दीजिये जिस मौत से तुम भागते हो वो ज़रूर ही तुम पर आकर रहेगी, फिर तुम उस खुदा की तरफ लौटा दिए जाओगे, जो पोशीदा को भी जनता है और ज़ाहिर को भी, फिर वो तुम को तुम्हारे किये हुए काम भी बता देगा

9. يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نُودِيَ لِلصَّلَاةِ مِن يَوْمِ الْجُمُعَةِ فَاسْعَوْا إِلَىٰ ذِكْرِ اللَّهِ وَذَرُوا الْبَيْعَ ۚ ذَ‌ٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ

9. या अय्युहल लज़ीना आमनू इज़ा नूदिया लिस सलाति मिय यौमिल जुमु’अति फ़स ‘औ इला ज़िकरिल-लाहि व-ज़रुल बै’अ, ज़ालिकुम खैरुल लकुम इन कुन्तुम त’अलमून

9. ए मुसलमानों ! जब जुमा के दिन नमाज़ के लिए अज़ान दी जाये तो अल्लाह के ज़िक्र की तरफ़ दौड़ पड़ो और ख़रीद फ़रोख्त छोड़ दिया करो, अगर तुम समझ रखते हो तो तुम्हारे हक़ में ज्यादा बेहतर है

10. فَإِذَا قُضِيَتِ الصَّلَاةُ فَانتَشِرُوا فِي الْأَرْضِ وَابْتَغُوا مِن فَضْلِ اللَّهِ وَاذْكُرُوا اللَّهَ كَثِيرًا لَّعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ

10. फ़इज़ा क़ुज़ि-यतिस सलातु फन तशिरू फ़िल अरज़ि वबतगू मिन फजलिल लाहि वज़कुरुल लाहा कसीरल ल’अल्लकुम तुफ्लिहून

10. जब नमाज़ पूरी हो जाये तो अल्लाह की ज़मीन में फ़ैल जाओ, अल्लाह की रोज़ी तलाश करो और उस को कसरत से याद करते रहो ताकि तुम फलाह पाओ

11. وَإِذَا رَأَوْا تِجَارَةً أَوْ لَهْوًا انفَضُّوا إِلَيْهَا وَتَرَكُوكَ قَائِمًا ۚ قُلْ مَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ مِّنَ اللَّهْوِ وَمِنَ التِّجَارَةِ ۚ وَاللَّهُ خَيْرُ الرَّازِقِينَ

11. व इज़ा रऔ तिजारतन औ लहवनिन फज़-ज़ू इलैहा व-त-रकू-क क़ाइमा क़ुल मा ‘इन्दल लाहि खैरुम मिनल लहवि वमिनत तिजारह वल-लाहू खैरुर राज़िकीन

11. और जब ये तिजारत या खेल तमाशा देखते हैं तो उस की तरफ दौड़ पड़ते हैं और आप को खड़ा छोड़ जाते हैं, आप फरमा दीजिये कि जो कुछ अल्लाह के पास है, वो खेल तमाशा और खरीद फरोख्त से बेहतर है और अल्लाह सब से बेहतर रोज़ी देने वाले हैं।

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