Dua e Masura in Hindi

नमाज़ के दरमियान पढ़ी जाने वाली दुआ जिसे दुआ मसूरा या दुआ ए मसूरा (dua e masura) भी कहा जाता है| दुआ मसूर कब पढ़ा जाता है (Dua masura kab padha jata hai) चलिए जानते है|

Dua e Masura in Hindi | दुआ ए मासुरा हिंदी में

Dua e Masura in Hindi दुआ ए मसूरा हिन्दी में

नमाज़ के दरमियाँ पढ़ी जाने वाली दुआ जिसे दुआ मासुरा कहा जाता है। हर मुसलमान को ये दुआ लाज़मी आनी चाहिए। दुआ ए मासुरा बड़े अज़र-ओ-सवाब कमाने का बाइस है। यहाँ→ Dua e Masura in Namaz-Arabic Urdu Hindi English Translations देखिए|

दुआ ए मासुरा क्या है?

दुआ ए मासुरा नमाज़ मुकम्मल होने से बिल्कुल पहले पढ़ी जाती है। यानि जब हम अत्तहियात पढ़ लेते है फिर दुरूद शरीफ पढ़ते है। उसके बाद जो दुआ पढ़ी जाती है उसे दुआ ए मासुरा कहा जाता है।
मासुरा की दुआ पढ़ने के बाद सलाम फेरते है।

दुआ इ मासुरा का तर्जुमा याद करना भी बेहतरीन अमल माना जायेगा। क्योंकि जब आप किसी भी दुआ या क़ुरान की आयत के मतलब को समझ कर पढ़ते है, तो आपको ज़्यादा सवाब मिलता है।

हमारा दिल भी दुआ के मतलब को जान कर मुतमइन हो जाता है।

Dua e Masura Meaning In Hindi | दुआ ए मासुरा का तर्जुमा हिंदी में

“ए खुदा हमने अपने पर बहुत ज़ुल्म किया है, और हमारे गुनाहों को तेरे सिवा कोई माफ नहीं कर सकता, हमारी यह ख्वाहिश है, की तू हमे माफ कर दे। हम पर तु अपना रहम फरमा, तू बड़ा माफ करने वाला और सबपर रहम करने वाला है। अपना रहम-ओ-करम हम पर भी अदा कर।”

Dua e Masura Ki Fazilat Kya Hai? दुआ ए मासुरा के फायदे क्या है?

मासुरा की दुआ अपनी की गलतियों को अल्लाह त’आला के सामने इज़हार कर के माफी मांगने के लिए पढ़ी जाती है।

दुआ ए मासुरा को अगर सच्चे दिल से पढ़ते है तो रब्बुल ‘आलमीन अपने करम से आपके अगले-पिछले तमाम गुनाहो को मु’आफ फरमा देगा। आमीन

आप भी इस दुआ को हर नमाज़ में पढ़ने का म’अमूल यानी आदत बना लीजिए। ताकी सवाब कमाने का एक भी मौका आपसे छूट ना जाए। यहाँ→Wazu Karne Ka Tarika in Hindi देखिए|

इस दुआ को पढ़ने से घर में बरकत आती है। ज़ाहिर सी बात है क्योंकि अल्लाह पाक से मु’आफी की दुआ करने से अल्लाह पाक खुश होता है।

और जब अल्लाह अज़्जवजल अपने बंदो से राज़ी होता है, तो अपने फज़ल-ओ-करम से नवाज़ देता है। और तमाम बिगड़े काम बनने लग जाते है। इंशा अल्लाह

आपकी भी जिंदगी में बहुत से काम रुके हैं?

तो इस दुआ को नमाज़ में सलाम फेरने से पहले और नमाज़ के बाद तस्बीह और अल्लाह पर से मु’आफी मांगने के तौर पर भी पढ़ सकते है। ऐसे आपको ये दुआ भी याद हो जायेगी।

Allahumma Inni Zalamtu Nafsi Dua In Roman

“Allahumma inni zalumtu nafsi zulman kathiran, Wala yaghfiru dh-dhunuba illa anta, fa ghfir li maghfiratan min ‘indika, wa r-hamni, innaka anta l-ghafuru r-rahim”

Dua e Masura Ki Hadees

हदीस

अबू बकर सिद्दीक़ र.अ. ने बयान किया, मैंने रसूल अल्लाह ﷺ से दरख़्वस्त की के मुझे कोई ऐसी दुआ सिखाईये जो मैं अपने नमाज़ में पढ़ सकूँ। इसके बाद आप ﷺ ने फरमाया, ये दुआ पढ़ो:

दुआ ए मसूरा हिन्दी में

“अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा, वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता, फग़फिरली मग़ फि-र-तम्मिन ‘इनदिका, वर ‘हमनी इन्नका अनतल ग़फ़ूरूर्र रहीम।”

दुआ ए मसूरा अरबी में

’’اللہم انّی ظلمت نفسی ظلمان کاتھیران، و لا یغفیرُدُنُبَا اِلٰہَ اِنَّتَ، فَغَفِرَ لَا مَغْفِرَتَنَ مِنْ عِندَکَ، وَرَحْمَنِی، اِنَّکَ انت غفور الرحیم‘‘

दुआ ए का तर्जुमा की हिन्दी में हदीस

“तेरे सिवा कोई गुनाहों को बख्शने वाला नही, तु मुझे मु’आफ करदे और मुझ पर रहम फरमा, तु बड़ा बख्शने वाला, निहायत रहम करने वाला है।”

अल-बुखारी, मुस्लिम रियाज़ अस-सालिहीन न. 1475

यहाँ→Kunde Ki Niyaz in Hindi देखिए|

Dua e Masura Kab Padhi Jati Hai? दुआ ए मासुरा कब पढ़ी जाती है?

कोई भी नमाज़ चाहे वो फर्ज़ नमाज़ हो या सुन्नत। दो या चार रक’अत के बाद बैठते है। जिस में अत्तहिय्यत पढ़ी जाती है, फिर दरूदे शरीफ पढ़ते है।

फिर उसके बाद दुआ मासुरा पढ़ते है। इस दुआ को पढ़ने के फिर सलाम फेल कर दुआ के लिए हाथ उठाई जाती है।

दुआ ए मसुरा कैसे पढ़ा जाती है?

जिस तरह नमाज़ में अत्ताहियात या फिर दरूद शरीफ पढ़ते है, ठीक उसी तरह दुआ-ए-मासुरा भी बैठ कर सलाम फेरने से पहले पढ़ते है।

दुआ-ए-मासुरा पढ़े बिना क्या नमाज़ पूरी नहीं होगी?

जी हाँ, दुआ-ए-मासुरा याद ना हो तो भी आपकी नमाज़ हो जायेगी। ऐसा किसी हदीस में नही लिखा के इस दुआ के बग़ैर नमाज़ नही होगी।

लेकिन इसको पढ़ने की तलकीन खुद नबी-ए-करीम ﷺ ने अपने साहाबा को की थी। तो नमाज़ में सलाम फेरने से पहले इस दुआ को पढ़ना बेशक़ अल्लाह को राज़ी करने का आसान तरीका है।

दुआ ए मासुरा पढ़ना भूल जाए तो क्या नमाज़ हो जायेगी?

जी हाँ, अगर किसी ज़रूरी काम की वजह से आपको दुआ मासुरा छोड़ना पड़ जाए या आप अंजाने में पढ़ना भूल जाए तो भी आपकी नमाज़ ही जायेगी।

मासुरा की दुआ याद ना हो तो क्या करें?

दुआ-ए-मासुरा हर मुसलमान को याद होना बहुत ज़रूरी है। लेकिन अगर आपको ये दुआ याद नहीं हो, तो इसकी जगह आप कोई भी दूसरी दुआ पढ़ कर सलाम फेर सकते है।

वक़्त मिलने पर दुआ ए मासुरा याद कर लीजिये ताके आपकी नमाज़ मुकम्मल हो जाए।

मुकम्मल नमाज़ अदा कीजिये!

इस दुआ को खुद भी पढ़िये और अपनो को शेयर कीजिये।

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5 Comments

  1. Aoa Sir.
    Mene apka 1 Wazifa (Sugar Puriya) karna tha to mene 3 din continue tahajjud k time YaALLAH Nikah Istekhara kiya, koi sign to nhi mila mgr kl 1 dream aya k mere area ki 1 road jo tuti hui h wo new ban chuki h or mai os road pr se guzar raha hu. Ab aap rehnumai farmyn k kya ya Istekhara ka Sign hoskta h ya something else, dream ka time mjy exactly yd nhi.

    Secondly ye k mene kisi k dil m mohbbt peda krny ka 11 roz ka wazifa (Qad Shaghafaha Hubba) complete krlia or continue kiya hua h for 21 days, basically mete office ki 1 collegue hain mai unhy pasand krta hu but itni koi baat nhi hui hamari kbhi bhi.

    Ab aap guide lrden k konsa wazifa thek rahega Sugar Puria or other.
    And dream ka bhi bta den k kya sign h bhi ya nhi & dream k according btaden k konsa wazifa best rahega.
    Please.

    1. jayaz muhabbat ke liye ye sugar wala hi karen ise chhoden nahi. Khwab se pareshani na ho.

  2. SA. Please can you send me the email in English as I cannot read Hindi.
    JazakAllah khair

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