Assalamu Alaikum Meaning In Hindi

November 6th, 2022

यानि आप पर सलामती हो! और ये दुआ है जो एक मुसलमान दूसरे मुसलमान से जब भी मिलता है या देखता है तो उसे हमेशा देता है। इसकी बहोत सी फ़ज़ीलत हदीस में बतलाई गई है| यहाँ सलामती अल्लाह पाक की तरफ से होती है। यानी जब अल्लाह त’आला किसी को सलामत रखता है। तो उस पर अल्लाह पाक की तरफ से बरकतें नाज़िल होती है।

Assalamu Alaikum Meaning In Hindi English

अस सलामु अलैयकुम हिन्दी में | Assalamu Alaikum Meaning In Hindi

हर मुसलमान तब तक एक सच्चा मोमिन नही बन सकता जब तक वो मुसलमान होने का फ़र्ज़ ना पुरा करे। और हर मुसलमान पर सलाम की अदायेगी वाजिब है। इसलिए इस पोस्ट में अस सलामु ‘अलैयकुम मीनिंग इन हिंदी आप सब के साथ शेयर कर रहे है।

अस सलामु ‘अलैकुम का मतलब हिन्दी में

सलाम का मतलब होता है, आप पर सलामती हो, और ये दुआ है जो एक मुसलमान दूसरे मुसलमान को देता है।

यहाँ सलामती अल्लाह पाक की तरफ से होती है। यानी जब अल्लाह त’आला किसी को सलामत रखता है। तो उस पर अल्लाह पाक की तरफ से बरकतें नाज़िल होती है।

एक हदीस-ए-मुबारिका का मफहूम है, नबी-ए-करीम मुहम्मद ﷺ ने फरमाया:

“बात करने से पहले सलाम करो”।

इस्लाम में सलाम क्यों करते है?

दूसरे मज़हब के लोग एक दूसरे से मिलने पर नमस्कार, गुड मॉर्निंग, गुड इवनिंग वग़ैरह जैसे अल्फ़ाज़ इस्तिमाल करते है।

लेकिन मजहब-ए-इस्लाम में मुसलमान भाई हो या बहन छोटा हो या बाडा जब भी दूसरे से मिलते है। तब सलाम के ज़रिये अल्लाह पाक का नाम ले कर, एक दूसरे को सलामती, हिफाज़त और बरकतों की दुआ देते है। और फिर दूसरी बाते शुरू करते है।

हदीस

‘आइशा र. अ. ने बयान किया:

“रसूल अल्लाह ﷺ ने मुझे फरमाया:

“ये जिब्राइल अ. स. है जो तुम्हे सलाम कह रहे है, मैंने जवाब दिया: “व-‘अलैयकुम अस सलाम व रहमतुल्लाह व ब-र-कातुहु”

अल-बुखारी, अल-मुस्लिम

रियाज़ अल-सालिहीन न. 851

यहाँ→Char Qul in Hindi Tarjuma देखिये|

इस्लाम में सलाम की एहमियत क्या है?

हदीस

अब्दुल्लाह बिन उमर बिन इल्यास र.अ. ने बयान किया एक आदमी ने रसूल अल्लाह ﷺ से पूछा:

इस्लाम में कोनसा अमल अफज़ल है?

आप ﷺ ने फरमाया: “खाना खिलाना और हर एक को सलाम करना, ख़्वाह तुम उसे जानते हो या नही जानते हो”।

अल-बुखारी, अल-मुस्लिम

रियाज़ अल-सालिहीन न. 844

क्या सलाम बड़े छोटे को कर सकता है?

जी हाँ, सलाम करने में छोटे बड़े को ना देखें। जब मौका मिले सलाम कर लिया करें।

हदीस

हज़रत अबू हरैराह र. अ. से रिवायत हौ कर नबी-ए-करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया:

“छोटे बड़े को सलाम करे, गुजरने वाला बैठे हुए को सलाम करे, और थोड़े आदमी ज़्यादा आदमियों को सलाम करें”

तिर्मिज़ी

हदीस

“रसूल अल्लाह ﷺ एक दिन मस्जिद में से ग़ुज़रे तो मस्जिद में औरतों की एक जमा’अत (उनमें से दस के क़रीब) बैठे हुए थे, उसने हाथ उठा कर सलाम किया”।

अत-तिर्मिज़ी (ने हसन क़रार दिया)

रियाज़ अल-सलिहीन 854

यहाँ→Aqeeqah Karne Ki Dua Aur Tariqa देखिये|

सलाम कब करना चाहिए?

मस्जिद में दाखिल होने से पहले सलाम करना ज़रूरी है।

हदीस

“मस्जिद में दाखिल होते वक़्त सलाम करना मसनून है”।

सहीह अल-मुस्लिम न. 713

घर में दाख़िल होने से पहले सलाम करना चाहिए, चाहे घर में कोई हो या ना हो।

हदीस

इब्न ‘अब्बास फरमाते है, के हज़रत उमर र.अ. नबी करीम ﷺ के घर गए और पूछा, या रसूल अल्लाह ﷺ अस-सलामु ‘अलैयकुम, क्या मैं अंदर आ जाऊँ?

सहीह अल-अलबानी

अल-अदब अल-मुफरद न. 1085

हदीस

हज़रत अनस र. अ. फरमाते है के मुझसे रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया, “ऐ बेटे, जब घर पर जाओ तो अपने अहल-ओ-अयाल को सलाम कर के दाखिल होना, इसलिए के तेरा सलाम करना तेरे और तेरे अहल-ओ-अयाल के हक़ में बरकत का बाइस होगा”।

तिर्मिज़ी न. 2698

क्या क़ुरआन पाक और नमाज़ पढ़ते हुए शख़्स को सलाम कर सकते है?

जी हाँ, नमाज़ पढ़ते हैं शख़्स को सलाम किया जा सकता है। इसकी ताख़ीर नीचे दिया गए हदीस से वाज़ेह होती है।

हदीस

“रसूल अल्लाह ﷺ एक दफा नमाज़ पढ़ रहे थे तो जाबीर बिन अब्दुल्लाह र.अ. ने आपको सलाम किया तो आप ने इशारे से जवाब दिया”।

सहीह अल-मुस्लिम: न.540

हदीस का मफहूम

“उक़बा बिन आमिर र.अ. से रिवायत है की हम मस्जिद में बैठे क़ुरआन पढ़ रहे थे तो रसूल अल्लाह ﷺ हमारे पास तशरीफ लाए, फिर आप ﷺ ने हमें सलाम किया, फिर हमे सलाम का जवाब दिया”।

फिर आप ﷺ ने फरमाया अल्लाह की किताब का इल्म हासिल करो और उसे (अपने हाफ़िज़े में जमा करो)।

“हाफ़िज़ इब्न कसीर र.अ. फरमाते है:

ये हदीस इस बात की दलील है की क़ुरआन पढ़ने वाले को सलाम कहा जा सकता है”।

यहाँ→Surah Baqarah in Hindi देखिये|

क्या सलाम करने से जन्नत मिलेगी?

नीचे दिए गए हदीस-ए-मुबारिका के मुताबिक सलाम करने से मुसलमान सलामती से जन्नत में दाखिल होगा।

हदीस

अब्दुल्लाह बिन सलीम र. अ. ने बयान, मैंने रसूल अल्लाह ﷺ को फरमाते हुए सुना के: “ऐ लोगों सलाम का तबादला करो (यानी एक दूसरे को अस सलामु ‘अलैयकुम कहो), लोगों को खाना खिलाओ, रिश्तेदारियों को मज़बूत करो, और जब दूसरे लोग हो तो नमाज़ पढ़ो, तो जन्नत में सलामती के साथ दाख़िल हो जाओगे”।

अत-तिर्मिज़ी (ने इसे हसन सहीह कहा है)

रियाज़ अल-सालिहीन न. 848

पहले सलाम करने वाले को कितनी नेकियाँ मिलती है?

पहले सलाम करने वाले को ज़्यादा नेकियाँ मिलती है। बा-शर्ते उसने पर सलाम किया हो और सही तरीके से सलाम किया हो।

• अगर आप “अस सलामु ‘अलैकुम” कहते है तो 10 नेकियाँ मिलेंगी।

• अगर आप “कहेंगे, तो 20 नेकियाँ मिलेंगी।

• और अगर आप “अस सलामु ‘अलैयकुम व रहमतुल लाहि व ब-र-कातुहु” कहेंगे तो 30 नेकियाँ मिलेंगी।

सलाम के जवाब देने पर केतनी नेकियाँ मिलती है?

सलाम का जवाब देने वाले को 10 नेकियाँ मिलती हैं। तो क्यों ना पहले सलाम करने की कोशिश की जाए।

एक हदीस का मफहूम पेश कर रही हूँ, नबी-ए-करीम ﷺ ने फरमाया:

“जब भी तुम किसी मुसलमान से मिलो तो उसे पहले सलाम करो”

इस हदीस से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं के, सलाम की इस्लाम में कितनी अहमियत है।

क्या सलाम का जवाब देना वाजिब है?

जी हाँ, सलाम का जवाब देना हर मुसलमान पर वाजिब है।

एक हदीस का मफहूम पेश कर रही हूँ:

रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया के,

“रास्तो में बैठने से बचो तो लोगो ने पूछा, या रसूल अल्लाह ﷺ, हम रास्ते में बैठते है और आपस में मिल कर बात करते है।

तो रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया के,

“तुम नहीं मानते और बैठना ही चाहते हो तो रास्ते का हक़ अदा करो”।

लोगो ने पूछा के रास्ते का क्या हक़ है?

आप ﷺ ने फ़रमाया,

“नज़र नीची रखना, सलाम का जवाब देना अच्छी बात का हुक्म देना, बुरी बात से मना करना”

एक रवायत के मफहूम पेश कर रही हूँ,

रास्ता बताना और एक रवायत में है फरयाद वाले की फरयाद सुनना और रास्ता भूले हुए को रास्ता बताना।

सलाम और क़यामत की निशानी?

हदीस

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसूद से मरवी है के अल्लाह के रसूल ﷺ ने इरशाद फरमाया:

“क़यामत के क़रीब सलाम सिर्फ ख़ास लोगों को किया जायेगा।

मसनद अहमद न. 509/1

हकीम न. 493/4

मुसानिफ अब्दुल रज्ज़ाक़ न. 5137

हदीस

अमीर बिन असवद र. अ फरमाते है के हम अब्दुल्लाह बिन मसूद र. अ. के साथ एक मस्जिद में गए तो जमा’अत खड़ी थी, फिर लोगों ने रुकु किया और हम भी रुकु करते हुए शामिल हो गए।

दारैन असना में एक आदमी आया और कहने लगा अबू अब्दुल रहमान इब्न मसूद र. अ. ने हालत-ए-रुकु में ही फरमाया:

अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने सच कहा था।

नमाज़ के इखतताम पर कुछ लोगों ने आप से पूछा के आप ने फलां शख्स के सलाम पर ये क्यों कहा:

अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने सच कहा था?

इब्न मसूद र. अ. ने फरमाया के मैंने नबी-ए-करीम ﷺ से सुना है के क़यामत की निशानियों में से है के सलाम सिर्फ मारफत की बिना पर कहा जायेगा।

मुसनद अहमद न. 483/1

हकीम न. 569/4

मजमु’आ अल-ज़वाइद न. 67/8

यहाँ→Zina Se Bachne Ki Dua देखिये|

हदीस

इब्न मसूद र.अ. से मरवी है के अल्लाह के रसूल ﷺ ने इरशाद फरमाया:

“क़यामत की एक निशानी यह है के आदमी सिर्फ इसी आदमी से सलाम करेगा जिस से वो जान पहचान रखता होगा”।

मुसनद अहमद न. 507/1

क़यामत की निशानी है के सलाम का मेहदूद होना और सिर्फ मारफत रखने (जानने) वालों को ही सलाम करना।

यह चीजें सहाबा के दौर से देखने को मिल गयी।

हदीस

नबी-ए-करीम ﷺ का हुक्म आम है के:

“लोगों सलाम को आम करो”।

सुनन अत-तिर्मिज़ी, किताब सिफ़ात अल-क़यामत न. 2485

ऐसी बुरी निशानी बुरे लोगों पर से ही होगा लिहाज़ा हमे सलाम को आम करते हुए बुरे लोगों के गिरोह मे शामिल होने से बचना चाहिए।

क़यामत की निशानी (जान पहचान की बुनियाद पर सलाम)

हज़रत इब्ने मसऊद र. अ रिवायत करते है के, रसूल अल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया:

“अलामाते क़यामत में से एक अलामत यह है के एक शख्स दूसरे को सिर्फ जान पहचान की बुनियाद पर सलाम करेगा”।

रवाह अहमद न. 406/1

क़यामत की निशानियों में एक निशानी यह भी है के लोग एक दूसरे को पहचानेंगे तभी सलाम करेंगे, मुसलमान होने की वजह उनके लिए कोइ माईने नही रखेगी।

सलाम करने की फज़ीलत क्या है?

दुनियाँ में बुलंदी पाने का रास्ता

हज़रत अबू दर्दा र.अ. से रिवायत है के रसूल अल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया:

“सलाम को खूब फैलाओ ताके तुम बुलंद हो जाओ”

रवाह अल-तब्रानी व असनाद हसन मजमुअ’अह अल-ज़वाईद न. 65/8

सलाम तकब्बुर से बचाती है

हज़रत अब्दुल्लाह र. अ. से रिवायत है के नबी-ए-करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया:

“सलाम में पहल करने वाला तकब्बुर् से बरी है”

बैहक़ी

तक़ब्बुर एक ऐसी चीज है जो आपको अल्लाह पाक से दूर ले जाती है। इसलिए सलाम करने का म’अमूल बना लीजिये ताके आप तक़ब्बुर से बचे रहे।

घर में लडाई झगड़े नही मुहब्बत होगा

हदीस

हज़रत अबू हरैराह र. अ. से रिवायत है के,

रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:

“तुम जन्नत में नही जा सकते जब तक के मोमिन ना हो जाओ (यानी तुम्हारी जिंदगी इमान वाली न हो जाए) और तुम उस वक़्त तक मोमिन नही हो सकते जब तक आपस में एक दूसरे से मुहब्बत न करो,

क्या में तुम्हे वो अमल न बताऊँ जिसके करने से तुम्हारे दरमियाँ मुहब्बत पैदा हो जायेगी?

और वो ये है के ” सलाम को आपस में खूब फैलाओ”।

सलाम करने से दिल में नरमी आती है, अपने साथ उसके दिल में भी नरमी पैदा होगी जिसे आप सलाम कर रहे है। इंशा अल्लाह

अपनों पर रहमते और बरकते भेजने का असबाब।

यहाँ→Bazar Me Jane Ki Dua देखिये|

हदीस

हज़रत अनस र. अ. से रिवायत है के रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया, अस-सलाम (अमन) अल्लाह पाक का एक नाम है जिसे किया जाता है उसपर अल्लाह पाक की रहमते और बरकते नाज़िल होती है। तो आपस में सलाम किया करो।

अल-अदब, अल-मुफरद न. 989

हसन, अल-अलबानी

जिनसे आप मुहब्बत करते है उन्हे सलाम कर के उनपर अल्लाह पाक के नाम के ज़रिये खूब रहमते और बरकतें भेजें।

सलाम करने का सही और सुन्नत तरीक़ा क्या है?

बहुत से लोग सही सलाम तरीक़े के बजाए, गलत तरीका इस्तिमाल करते है।

जैसे: “असालामु अलैकुम”

सलाम करने का ये तरीका बिल्कुल गलत है।

सलाम कैसे किया जाता है?

सलाम करने के सही तरीका ये है:

“अस्सलामु ‘अलैकुम व रहमतुल लाहि व बरकातुह”।

तर्जुमा:

“तुम पर सलामती हो और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें हों”।

आप चाहे तो अस्सलामु ‘अलैकुम भी कह सकते है, लेकिन इसका सवाब थोड़ा कम हो जायेगा।

सलाम के जवाब में ये तरीका इस्तिमाल करना चाहिए:

“व अलैकुम अस्सलाम व रहमातुल-लाहि व बरकातुह”

“तुम पर भी सलामती हो और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें हो”।

आप चाहें तो व ‘अलैकुम अस्सलाम, के अलफाज़ भी इस्तिमाल कर सकते है।

सलाम करने का गलत तरीक़ा क्या है?

लोग ना सिर्फ गलत तरीक़े से सलाम कर के नेकिया कमाने का मौका खो देते है। बल्कि ग़लत तरीके से सलाम करके गुनाह भी कमाते है।

सलामलेकुम, सामलैकुम, सामुअलैकुम वगैरह जैसे जो भी अलफाज़ कह कर सलाम करते है।

वो तरीका बिल्कुल सही नहीं है, इस तरह से सलाम करने से, सलाम का मतलब बदल जाते हैं। जैसे सामुअलैकुम (तुम पर मौत आ जाए)।

यहाँ बात सलामती,बरकत और रहमत से हट कर मौत पर आ जाती है।

हदीस

अबू जुराय अल-हुजैमि ने बयान किया:

मै नबी-ए-करीम ﷺ के पास गया और सलाम-लैकुम कहा, फिर आप ﷺ ने मुझे ऐसे कहने से मना फरमाया, और कहा ऐसा कहना मतलब मौत की दुआ देना है।

सहीह, अल-अलबानी

सुनन अबी दावूद, न. 5209

इस बात का ख़ास ख़्याल रखिये के आपके मुँह से सलाम के सही अल्फ़ाज़ निकले। ताकी आपके ज़बान से आपने प्यारों, दोस्तो और एहबाबों के लिए कहीं मौत की दुआ ना निकल जाए।

अपनों को सलामती भेजें!!

सलाम के साथ इस पोस्ट को अपने दोस्तों रिश्तेदारों से ज़रूर शेयर करें!
Agar apko post pasand aye to apno se share zarur kijiyega.
अपने प्यारों से शेयर कर सवाब-ए-जारिया ज़रूर कमायें|

Join ya ALLAH Community!

FaceBook→ yaALLAHyaRasul

Subscribe to YouTube Channel→ yaALLAH Website Official

Instagram par Follow Kijiye instagram.com/yaALLAH.in

Apne sawal yahan puchiye!