Miracle Prayer in Islam How to Connect with ALLAH?

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अल्लाह त’आला से नज़दीकियाँ बनाने, दिल में मुहब्बत बढ़ाने, और अल्लाह की अमान व अता’अत में ता-उम्र रहने के वज़ीफा हिंदी ज़ुबान में सिर्फ या अल्लाह वेबसाइट पर

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वज़ीफ़ा ‘अदद 1 दिल में अल्लाह त’आला का ख़ौफ़ पैदाह करने का अमल हिंदी ज़ुबान में

अगर कोई शख़्स रोज़ाना रात को सोते वक़्त सूरह अदद 104 अल-हुमज़ह एक (1) मरतबाह पढ़ेगा| तो इसके पढ़ने से इन्शा अल्लाहुल ‘अज़ीज़ उसके दिल में अल्लाह त’आला का ख़ौफ़ पैदाह होगा| और उस शख़्स का दिल बुराइयों की तरफ से फिर जायेगा| और वो नेकियों की तरफ राग़िब होगा| फिर अल्लाह त’आला उसे नेक अमल की ज़्यादा से ज़्यादा तौफ़ीक़ अता करेगा, इन्शा अल्लाह, आमीन|

ग़ौरतलब: ख़वातीन हैज़/माहवारी के दिनों में ये वज़ीफ़ा ना करें|

वज़ीफ़ा ‘अदद 2 अल्लाह त’आला की अता’अत और फरमाबरदारी करने के लिए अमल

अगर कोई शख़्स इस्म-ए -मुबारक ”या मुक़द्दीमु” को हमेशा 1000 मरतबाह वज़ीफ़ा या विर्द के तौर पर पढ़ेगा तो उसकी नफ़्स अल्लाह त’आला की अता’अत गुज़ार और फर्माबरदार हो जाएगी और वो शख़्स गुनाहों से बचा रहेगा|

इससे बढ़कर इस जहाँ में किसी अल्लाह के बन्दे को और क्या चाहिए?

ग़ौरतलब: ख़वातीन हैज़/माहवारी के दिनों में ये वज़ीफ़ा ना करें|

वज़ीफ़ा ‘अदद 3 अल्लाह त’आला की अमान में रहने के लिए अमल

जो शख़्स फजर की नमाज़ के बाद सौ (100) मरतबाह सूरह ‘अदद 107 सूरह अल-मा ‘ऊन की तिलावत करेगा, उसे अल्लाह त’आला अपने फज़ल और करम से हमेशा अपनी अमान में रखेगा|

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ग़ौरतलब: ख़वातीन हैज़/माहवारी के दिनों में ये वज़ीफ़ा ना करें|

वज़ीफ़ा ‘अदद 4 अल्लाह त’आला की कफ़ालत के लिए अमल

अगर कोई शख़्स ये चाहता है के अल्लाह उसके तमाम कामों में वकील और कफ़ील हो| और उसे अल्लाह मख़लूक़ के शर से बचाए| अपनी मदद से उसकी रहनुमाई करे| बन्दों के दिल में उसकी मुहब्बत डाले और अपने फज़ल-ओ-करम से उसे अमीर कर दे तो वो ये वज़ीफ़ा शुरू करे| इन्शा अल्लाह, ग़ैबी इमदाद हासिल होगी|
अमल करने के तरीक़ा क्या है?

  • किसी भी दिन और किसी भी मुनासिब वक़्त ये अमल शुरू कर सकते हैं|
  • वुज़ू की हालात में ये अमल पढ़ना है|
  • क़ुर’आन पाक की इस आयत मुअबरिका की 450 मरतबाह तिलावत कीजिये|

‘हस्बुनल्लाह व ने’अ मल वकील’

(सुरह ‘अदद 3, आल-ए-इमरान आयत अदद 173)

  • फिर अल्लाह अज़्ज़वजल से ख़ूब ख़ुशू-ओ-खुज़ु के साथ अपने मक़सद के लिए दु’आ कीजिये|
  • ये अमल रोज़ाना बिला-नागाह कीजिये, जब तक के आपका मक़सद पूरा ना हो जाये|
  • इन्शा अल्लाह, बहुत जल्द आप अपने मक़सद में कामयाब होंगे, आपकी दिली हाजत पूरी होगी| आमीन|

ग़ौरतलब: ख़वातीन हैज़/माहवारी के दिनों में ये वज़ीफ़ा ना करें|

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